मोदी को बताया बड़ा भाई

 मोदी को बताया बड़ा भाई



फ़रवरी 2019 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान भारत के दौर पर आए थे. क्राउन प्रिंस नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुँचे तो उनकी अगवानी में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खड़े थे. पीएम मोदी प्रोटोकॉल तोड़ एयरपोर्ट पर पहुँचे थे.


क्राउन प्रिंस तब सऊदी अरब के प्रधानमंत्री भी नहीं बने थे. इसी दौरे में नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में सऊदी क्राउन प्रिंस ने कहा था, ''हम दोनों भाई हैं. प्रधानमंत्री मोदी मेरे बड़े भाई हैं. मैं उनका छोटा भाई हूँ और उनकी प्रशंसा करता हूँ.


अरब प्रायद्वीप से भारत का संबंध हज़ारों साल पुराना है. यहाँ तक कि इतिहास लिखे जाने से पहले से. अरब प्रायद्वीप और भारत के बीच का संबंध हमारे डीएनए में है.''


भारत के दौरे पर आए मोहम्मद बिन सलमान ने कहा था, ''पिछले 70 सालों से भारत के लोग दोस्त हैं और सऊदी के निर्माण में ये भागीदार रहे हैं.''


कई विशेषज्ञों का मानना है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत से खाड़ी के देशों से रिश्ते मज़बूत हुए हैं. कई लोग यह भी मानते हैं कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी की जो कथित रूप से मुस्लिम विरोधी छवि बनी थी उसे तोड़ने के लिए उन्होंने खाड़ी के देशों पर ख़ासा ध्यान दिया.


:- भारत और ईरान में क्या पक रहा है? एक महीने में जयशंकर का दूसरा दौरा


साल 2022 के मई महीने के आख़िर में बीजेपी की प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा ने पैग़ंबर मोहम्मद को लेकर विवादित टिप्पणी की थी और जून शुरू होते ही इसे लेकर इस्लामिक देशों से तीखी प्रतिक्रिया आने लगी.


इसी समय भारत के तत्कालीन उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू क़तर के दौरे पर गए थे. ख़बर आई कि क़तर ने ग़ुस्से में वेंकैया नायडू के साथ होने वाला राजकीय भोज रद्द कर दिया था. कई लोग मानते हैं कि इससे भारत की प्रतिष्ठा को धक्का लगा.


क्या नूपुर शर्मा का बयान भारत के लिए धक्का था? लीबिया और जॉर्डन में भारत के राजदूत रहे अनिल त्रिगुणायत कहते हैं, ''मुझे नहीं लगता है कि अरब के देशों से भारत के संबंध इतने कमज़ोर हैं कि कुछ घटनाओं का इतना असर होगा.


यह बात बिल्कुल सही है कि इस सरकार ने अरब वर्ल्ड को अपनी प्राथमिकता में रखा है. मोदी सरकार में अरब दुनिया से रिश्ते मज़बूत हुए हैं. मैं इस बात को ज़रूर मानता हूँ कि भारत में इस्लामिक विरासत हमारी साझी संस्कृति का हिस्सा है और इसका इस्तेमाल अरब देशों से दोस्ती मज़बूत करने में और करना चाहिए.''


अनिल त्रिगुणायत कहते हैं, ''खाड़ी के देशों में क़रीब 90 लाख भारतीय काम करते हैं. भारतीयों ने अपनी मेहनत और ईमानदारी से इन देशों में अच्छी प्रतिष्ठा बनाई है. हमारी घरेलू राजनीति में इसका ख़्याल रखना चाहिए कि कुछ ऐसा ना हो जिससे इनकी मेहनत पर पानी फिर जाए.


इन देशों में भारत की बहुत अच्छी छवि है और इसे मज़बूत करने के लिए मोदी सरकार ने भी काफ़ी मेहनत की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सऊदी अरब और यूएई ने अपना सर्वोच्च सम्मान भी दिया है.''

Comments